
गौरी-पार्वती पूजा
प्रेम और श्रृंगार के साथ देवी पार्वती का सम्मान करने की कोमल पूजा
यह आमतौर पर तीज और गौरी तृतीया पर की जाती है, और कई परिवार सोमवार की सुबह भी इसका छोटा रूप करते हैं।
लगभग 40 मिनट
गौरी-पार्वती पूजा देवी पार्वती का सम्मान है, जिन्हें उनकी भक्ति, शक्ति और परिवार के प्रति कोमल स्नेह के लिए प्रेम किया जाता है। यह एक सुंदर और उल्लासभरी पूजा है, जिसमें देवी का स्वागत किया जाता है और उन्हें किसी प्रिय अतिथि की तरह श्रृंगार से सजाया जाता है। सरल भेंट और स्नेह भरा मन काफ़ी हैं; पंडित जी ज़रूरी नहीं। हर परिवार और हर क्षेत्र में तरीक़ा थोड़ा अलग होता है, इसलिए जहाँ आपके परिवार या पंडित जी का तरीक़ा इस गाइड से अलग हो, वहाँ उन्हीं का तरीक़ा अपनाएँ।
ज़रूरी सामग्री
सामान जमा करते हुए हर चीज़ पर टिक लगाइए। टिक इसी फ़ोन में रहते हैं।
एक दिन पहले
- घर और पूजा के कोने की सफ़ाई करें, स्नान करें और ताज़े कपड़े पहनें; तीज पर कई महिलाएँ लाल, हरे या पीले रंग पहनना पसंद करती हैं।
- श्रृंगार का सामान एक छोटी थाली में एक साथ सजा लें, ताकि एक-एक करके चढ़ाना आसान रहे।
- फूल, फल और मिठाई ले आएँ और देख लें कि सूची की हर चीज़ तैयार है।
- पंचामृत पूजा से ठीक पहले बनाएँ या लाएँ, ताकि ताज़ा रहे।
- परिवार को पूजा का समय बता दें और बच्चों सहित सबको साथ बैठने के लिए बुलाएँ।
कदम-दर-कदम विधि
- 1
सफ़ाई और तैयारी
पूजा के कोने और घर के प्रवेश की सफ़ाई करें। स्नान करके ताज़े, साफ़ कपड़े पहनें। एक पल शांति से बैठें और मन को शांत और प्रसन्न होने दें।
- 2
वेदी सजाएँ
चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएँ। उस पर देवी पार्वती की मूर्ति या तस्वीर विराजमान करें और नीचे थोड़े चावल रखें। चाहें तो शिव जी को उनके पास रखें। थाली और सारी सामग्री पास में रखें।
- 3
कलश रखें
कलश में पानी भरें और उसमें एक सिक्का, एक सुपारी और चुटकी भर चावल डालें। ऊपर नारियल रखें और उसके चारों ओर कलावा बाँधें। इसे मूर्ति के पास रखें।
- 4
दीया जलाएँ और बैठें
घी का दीया और अगरबत्ती जलाएँ। आसन पर बैठकर कुछ शांत साँसें लें और अपने ऊपर तथा सामग्री पर गंगाजल की कुछ बूँदें छिड़कें। अपने शब्दों में कहें कि आप प्रसन्न मन से यह पूजा कर रहे हैं।
- 5
देवी का स्वागत
हाथ जोड़कर देवी गौरी-पार्वती को प्रिय अतिथि की तरह घर में आमंत्रित करें। थोड़ा जल अर्पित करें, फिर कुमकुम, हल्दी, चंदन और कुछ चावल के दानों से तिलक लगाएँ।
- 6
पंचामृत अर्पित करें
छोटे चम्मच से देवी को पंचामृत की कुछ बूँदें अर्पित करें। मूर्ति धातु की हो तो उसे पानी से हल्के से स्नान कराकर साफ़ कपड़े से पोंछ सकते हैं। बाकी पंचामृत प्रसाद में बाँटने के लिए रखें।
- 7
श्रृंगार अर्पित करें
पहले लाल चुनरी अर्पित करें, फिर सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, मेहंदी, कंघी और शीशा एक-एक करके चढ़ाएँ। समय लेकर प्रेम से करें, जैसे किसी प्रिय को सजा रहे हों। बाद में चूड़ियाँ और कुछ सामान प्रसाद के रूप में परिवार की किसी महिला को दिए जा सकते हैं।
- 8
फूल और भोग अर्पित करें
माला और फूल उनके चरणों में रखें और पान के पत्ते सुपारी और सिक्के के साथ चढ़ाएँ। फिर फल और मिठाई थाली में सजाकर देवी के सामने रखें, उसके चारों ओर पानी की कुछ बूँदें छिड़कें और हाथ जोड़कर एक मिनट अर्पित करें। पूजा पूरी होने तक इसे ढककर रखें।
- 9
मंत्र जाप
शांति से बैठकर "ॐ गौर्यै नमः" 11 या 108 बार बोलें। गिनती माला से या चावल के दानों से कर सकते हैं। पूरा परिवार साथ बोल सकता है, और बच्चे बस आपके पीछे दोहरा सकते हैं।
- 10
आरती करें
थाली में कपूर जलाएँ और गौरी-पार्वती की आरती, "जय पार्वती माता", या आपके परिवार को आने वाली कोई सरल आरती गाएँ। थाली को धीरे-धीरे घड़ी की दिशा में घुमाएँ और घंटी हल्के से बजाएँ। फिर सब लौ के ऊपर से हाथ घुमाकर आँखों से लगाएँ।
- 11
समापन और प्रसाद
प्रणाम करें, पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें और देवी को धन्यवाद कहें। पंचामृत और प्रसाद सबको बाँटें और कलाई पर कलावा बाँधें। दीये को सुरक्षित रूप से अपने आप जल जाने दें।
ॐ गौर्यै नमः
Om Gauryai Namah
ॐ, मैं देवी गौरी को प्रणाम करता हूँ।
काम की बातें
- तीज, गौरी तृतीया और सोमवार को सामान्यतः सुबह का समय उपयुक्त है; जो आपके परिवार को सुविधाजनक हो, वही चुनें।
- श्रृंगार अर्पित करने में घर की महिलाएँ और बेटियाँ आगे रहें, और बच्चे फूल सजाने में मदद करें।
- माहौल उल्लासभरा रखें: कुछ भजन गाएँ और कुछ चटख, उत्सव जैसा पहनें।
- जितना आराम से हो सके उतना ही चढ़ाएँ; सच्चे मन की भेंट लंबी सूची से ज़्यादा मायने रखती है।
- पास में पानी की कटोरी और कपड़ा रखें, ताकि गिरी चीज़ें पोंछ सकें और दीया सावधानी से सँभाल सकें।
- कोई चरण भूल जाएँ तो शांति से आगे बढ़ें; पूजा का असली भाव श्रद्धा है।
इन बातों का ध्यान रखें
- जलते दीये या कपूर को अकेला न छोड़ें, ख़ासकर पर्दों, दुपट्टों या बच्चों के पास।
- मुरझाए फूल या टूटे चावल चढ़ाने से बचें; ताज़े और साबुत सबसे अच्छे रहते हैं।
- पूजा जल्दबाज़ी में न करें और बीच में फ़ोन देखने से बचें।
- छोटी-मोटी भूलों की चिंता न करें; पूजा को दोबारा करने की ज़रूरत नहीं है।
परिवार और क्षेत्र के अनुसार तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। जहाँ अलग हो, वहाँ अपने परिवार या पंडित जी का तरीका मानिए।