
कृष्ण पूजा
कृष्ण जी की प्रेम भरी घरेलू पूजा, लड्डू गोपाल सेवा सहित
यह जन्माष्टमी पर आधी रात या शाम को की जाती है, और कई परिवार इसे गुरुवार को या किसी भी दिन भक्ति भाव से करते हैं।
लगभग 40 मिनट
कृष्ण पूजा एक कोमल और आनंद भरी पूजा है, जिसमें हम भगवान कृष्ण का घर के प्यारे बच्चे की तरह स्वागत करते हैं, उन्हें स्नान कराते हैं, वस्त्र पहनाते हैं, माखन-मिश्री का भोग लगाते हैं और भजन गाते हैं। इसके लिए पंडित जी ज़रूरी नहीं; प्रसन्न मन और सरल भेंट काफ़ी हैं। हर परिवार और हर क्षेत्र में तरीक़ा थोड़ा अलग होता है, इसलिए जहाँ आपके परिवार या पंडित जी का तरीक़ा इस गाइड से अलग हो, वहाँ उन्हीं का तरीक़ा अपनाएँ।
ज़रूरी सामग्री
सामान जमा करते हुए हर चीज़ पर टिक लगाइए। टिक इसी फ़ोन में रहते हैं।
एक दिन पहले
- घर और पूजा के कोने की सफ़ाई कर लें, और वेदी की जगह को साफ़-सुथरा व रोशन रखें।
- ताज़े फूल, तुलसी के पत्ते, माखन-मिश्री और फल ले आएँ, और सूची की हर चीज़ देख लें।
- घर में लड्डू गोपाल हों तो उनके छोटे वस्त्र, मुलायम तौलिया और स्नान के लिए कटोरी तैयार रखें।
- दीये की बत्तियाँ तैयार कर लें, और माचिस या लाइटर वेदी के पास सुरक्षित रखें।
- जन्माष्टमी पर कई परिवार व्रत रखते हैं और आधी रात को पूजा करते हैं; समय मिलकर तय कर लें और बच्चों को पहले थोड़ा आराम करा लें।
कदम-दर-कदम विधि
- 1
सफ़ाई और तैयारी
पूजा शुरू करने से पहले पूजा का कोना साफ़ करें और स्नान कर लें। साफ़, ताज़े कपड़े पहनें; पीला रंग बहुत सुंदर रहता है। मूर्ति और भोग की चीज़ों को छूने से पहले हाथ धो लें।
- 2
वेदी सजाएँ
पूजा के कोने में चौकी रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएँ। कृष्ण जी को बीच में बिठाएँ और उनके नीचे थोड़े चावल रखें। थाली, फूल, तुलसी और भोग की चीज़ें पास में रखें।
- 3
दीया जलाएँ और बैठें
घी का दीया और अगरबत्ती जलाएँ। आसन पर बैठकर कुछ शांत साँसें लें और अपने ऊपर तथा सामग्री पर गंगाजल की कुछ बूँदें छिड़कें। अपने शब्दों में कहें कि आप प्रेम से यह पूजा कर रहे हैं।
- 4
कृष्ण जी का स्वागत
हाथ जोड़कर कृष्ण जी को घर के प्यारे बच्चे की तरह निमंत्रण दें। घंटी हल्के से बजाएँ और उनके चरणों में थोड़ा जल अर्पित करें। आप कोई छोटा भजन गा सकते हैं या बस "स्वागत है, कान्हा" कह सकते हैं।
- 5
स्नान कराएँ
लड्डू गोपाल को साफ़ थाली या कटोरी में रखकर थोड़ा दूध या पंचामृत धीरे से डालें, फिर गंगाजल या साफ़ पानी से धो लें। साफ़ कपड़े से हल्के से पोंछ दें। तस्वीर या बड़ी मूर्ति हो तो बस कुछ बूँदें छिड़ककर हल्के से पोंछ दें।
- 6
वस्त्र और श्रृंगार
उन्हें ताज़े वस्त्र पहनाएँ, और मोरपंख, छोटी बाँसुरी या माला हो तो सजाएँ। हल्का चंदन का तिलक लगाएँ। उन्हें चौकी पर विराजमान करें और पूरा परिवार साथ मिलकर दर्शन करे।
- 7
फूल और तुलसी अर्पित करें
फूल और माला उनके चरणों में रखें और कुछ तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। सिक्के, पान का पत्ता और सुपारी पास में रखें। परिवार का हर सदस्य एक-एक फूल चढ़ा सकता है, बच्चों को यह करना अच्छा लगता है।
- 8
भोग लगाएँ
साफ़ थाली में माखन-मिश्री, मिठाई और फल रखें और ऊपर एक तुलसी का पत्ता रखें। भोजन सादा और ताज़ा बना हो, आमतौर पर बिना प्याज़-लहसुन के। हाथ जोड़कर एक मिनट के लिए अर्पित करें और पूजा पूरी होने तक ढककर रखें।
- 9
मंत्र जाप
शांति से बैठकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" 11 या 108 बार बोलें। गिनती माला से या चावल के दानों से कर सकते हैं। पूरा परिवार साथ बोल सकता है, और बच्चे बस आपके पीछे दोहरा सकते हैं।
- 10
आरती करें
थाली में कपूर जलाएँ और सब मिलकर कृष्ण जी की आरती, जैसे "आरती कुंज बिहारी की", गाएँ। थाली को उनके सामने धीरे-धीरे घड़ी की दिशा में घुमाएँ, और शंख हो तो हल्के से बजाएँ। फिर सब लौ के ऊपर से हाथ घुमाकर हल्के से आँखों से लगाएँ।
- 11
समापन और प्रसाद
प्रणाम करें, पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें और कृष्ण जी को धन्यवाद कहें। जन्माष्टमी पर कई परिवार आधी रात के बाद छोटे झूले को हल्के से झुलाते हैं और जन्म के गीत गाते हैं। सबको प्रसाद बाँटें और कलाई पर कलावा बाँधें।
- 12
लड्डू गोपाल की रोज़ की सेवा
यदि आपके घर में लड्डू गोपाल हैं, तो कई परिवार उनकी बच्चे की तरह देखभाल करते हैं: सुबह धीरे से जगाना, स्नान और वस्त्र, भोजन के समय सादा भोग, और रात को विश्राम कराना। इसे सरल रखें और केवल उतना ही करें जितना आपका परिवार प्रेम से नियमित रूप से कर सके।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
ॐ, मैं भगवान वासुदेव, श्रीकृष्ण को प्रणाम करता हूँ।
काम की बातें
- जन्माष्टमी पर आधी रात का समय प्रचलित है; अन्य दिनों में सुबह या शाम दोनों ठीक रहते हैं।
- माहौल हल्का और आनंद भरा रखें; कृष्ण जी की पूजा गीत, कहानियों और थोड़ी मस्ती के साथ की जाती है।
- बच्चों को शामिल करें: वे बड़ों की मदद से छोटे लड्डू गोपाल को सजा सकते हैं, फूल चढ़ा सकते हैं और आरती गा सकते हैं।
- जितना आराम से हो सके उतना ही चढ़ाएँ; सच्चा प्रेम लंबी सूची से ज़्यादा मायने रखता है।
- स्नान और गिरी चीज़ों के लिए पास में पानी की कटोरी और मुलायम कपड़ा रखें।
- कोई चरण भूल जाएँ तो शांति से आगे बढ़ें; पूजा का असली भाव श्रद्धा है।
इन बातों का ध्यान रखें
- जलते दीये या कपूर को अकेला न छोड़ें, ख़ासकर पर्दों या बच्चों के पास।
- मुरझाए फूल या बासी भोजन चढ़ाने से बचें; ताज़ा और सादा सबसे अच्छा रहता है।
- पूजा जल्दबाज़ी में न करें और बीच में फ़ोन देखने से बचें।
- छोटी-मोटी भूलों की चिंता न करें; पूजा को दोबारा करने की ज़रूरत नहीं है।
परिवार और क्षेत्र के अनुसार तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। जहाँ अलग हो, वहाँ अपने परिवार या पंडित जी का तरीका मानिए।