
सरस्वती पूजा
पढ़ाई की शुरुआत शांत और कृतज्ञ मन से करने की सरल पूजा
आमतौर पर जनवरी या फरवरी में बसंत पंचमी पर की जाती है। कई परिवार और विद्यार्थी परीक्षा से पहले, या नया सत्र या नया कोर्स शुरू होने पर भी यह पूजा करते हैं।
लगभग 40 मिनट
सरस्वती माँ को ज्ञान, संगीत और कलाओं की देवी माना जाता है। यह पूजा विद्या के लिए धन्यवाद कहने और शांत, एकाग्र मन से पढ़ाई शुरू करने का एक सुंदर तरीका है। हर परिवार और हर क्षेत्र में पूजा थोड़ी अलग तरह से होती है, इसलिए जहाँ आपके परिवार या पंडित जी की विधि अलग हो, वहाँ उसी का पालन करें।
ज़रूरी सामग्री
सामान जमा करते हुए हर चीज़ पर टिक लगाइए। टिक इसी फ़ोन में रहते हैं।
एक दिन पहले
- पूजा का कोना और पढ़ाई की मेज़ साफ़ करें और किताबें सलीके से रख दें।
- फूल, फल और मिठाई पहले ही ले आएँ, या सुबह लाने की योजना बना लें।
- सारी सामग्री एक जगह इकट्ठी कर लें ताकि पूजा के बीच कुछ कम न पड़े।
- अगर चाहें तो कलम और कॉपी भी मूर्ति के पास रखने के लिए अलग निकाल लें।
- पूजा का समय तय कर लें, सुबह का समय अच्छा रहता है, और घर में सबको बता दें।
कदम-दर-कदम विधि
- 1
स्नान और वस्त्र
स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। बसंत पंचमी पर पीला रंग पसंद किया जाता है, पर कोई भी साफ़ और सादे कपड़े चलते हैं।
- 2
चौकी सजाएँ
चौकी पर पीला या सफ़ेद कपड़ा बिछाएँ और सरस्वती माँ को स्थापित करें, हो सके तो मुख पूर्व दिशा में रहे। गणेश जी को एक ओर और किताबें मूर्ति के पास रखें।
- 3
शांत बैठें और संकल्प लें
आसन पर मूर्ति की ओर मुख करके बैठें और कुछ गहरी साँसें लें। हथेली में थोड़ा जल लेकर अपने शब्दों में कहें कि आप विद्या के प्रति आभार के साथ यह पूजा कर रहे हैं।
- 4
कलश स्थापना
कलश में साफ़ जल भरें, उसके मुँह पर आम के पत्ते लगाएँ और ऊपर नारियल रखें। इसे चौकी के दाहिनी ओर रखें।
- 5
दीया और अगरबत्ती जलाएँ
घी का दीया और अगरबत्ती जलाएँ। अगरबत्ती को मूर्तियों की ओर हल्के से घुमाकर दिखाएँ।
- 6
पहले गणेश जी की पूजा
गणेश जी को हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएँ, फूल और अक्षत चढ़ाएँ और प्रणाम करके प्रार्थना करें कि पूजा अच्छे से पूरी हो।
- 7
माँ को तिलक लगाएँ
सरस्वती माँ को चंदन और हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएँ और कलश से थोड़ा जल छिड़कें। फिर अपने माथे पर भी छोटा सा तिलक लगा लें।
- 8
फूल और अक्षत अर्पित करें
माँ के चरणों में पीले या सफ़ेद फूल और चुटकी भर अक्षत अर्पित करें। किताबें, कलम और वाद्य यंत्र उनके पास रखें और फूल से हल्के से स्पर्श कराएँ।
- 9
मंत्र जाप
सरस्वती मंत्र 11 या 21 बार धीरे-धीरे और ध्यान लगाकर बोलें। अगर मंत्र न बोल पाएँ तो एक मिनट शांत बैठकर अपनी विद्या के लिए धन्यवाद करें।
- 10
भोग लगाएँ
फल और मिठाई साफ़ थाली में माँ के सामने रखें। हाथ जोड़कर सरल प्रार्थना के साथ भोग अर्पित करें और थाली के चारों ओर थोड़ा जल छिड़कें।
- 11
आरती करें
आरती की थाली में कपूर जलाएँ और सरस्वती आरती गाते हुए मूर्ति के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएँ। घर के सभी लोग साथ जुड़ सकते हैं।
- 12
समापन और प्रसाद
प्रणाम करके पढ़ाई में साफ़ मन और लगातार मेहनत की प्रार्थना करें। प्रसाद सबको बाँटें और हो सके तो पूजा के तुरंत बाद थोड़ी देर पढ़ाई शुरू करें।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
Om Aim Saraswatyai Namah
मैं ज्ञान और विद्या देने वाली देवी सरस्वती को प्रणाम करता हूँ।
काम की बातें
- सुबह का समय अच्छा रहता है क्योंकि मन ताज़ा होता है, पर कोई भी शांत समय चल सकता है।
- कलम और कॉपी मूर्ति के पास रखें ताकि बच्चे भी पूजा का हिस्सा महसूस करें।
- बच्चों को फूल चढ़ाने दें और अपनी छोटी प्रार्थना खुद बोलने दें।
- हो सके तो घी का दीया जलाएँ, नहीं तो तेल भी बिल्कुल ठीक है।
- पूजा के बाद सब मिलकर प्रसाद लें और थोड़ी देर पढ़ाई शुरू करें।
- पूजा सरल और सच्चे मन से करें; छोटी पूजा भी खुशी से की जाए तो पूरी मानी जाती है।
इन बातों का ध्यान रखें
- पूजा के दौरान किताबें या कॉपियाँ ज़मीन पर न रखें, उन्हें चौकी या साफ़ जगह पर रखें।
- किताबों को पैर से न लगाएँ, और अगर गलती से लग जाए तो हाथ से छूकर प्रेम से क्षमा माँग लें।
- जल्दबाज़ी में सारे चरण निपटाने से अच्छा है कि कम काम आराम से करें।
- मंत्र या क्रम में छोटी-मोटी भूल की चिंता न करें; सच्ची श्रद्धा सबसे ज़रूरी है।
परिवार और क्षेत्र के अनुसार तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। जहाँ अलग हो, वहाँ अपने परिवार या पंडित जी का तरीका मानिए।