
शिव पूजा और अभिषेक
शिव जी को जल और दूध अर्पित करने की सरल घरेलू पूजा
आमतौर पर सोमवार को, सावन के महीने में और महाशिवरात्रि पर की जाती है। कई परिवार जब भी महादेव को याद करना चाहें, किसी भी दिन कर लेते हैं।
लगभग 30 मिनट
शिव पूजा घर पर की जाने वाली सबसे सरल पूजाओं में से एक है। इसमें शिवलिंग को जल, दूध और कुछ अन्य चीज़ों से स्नान कराते हैं, बेलपत्र और फूल चढ़ाते हैं, और शांत बैठकर मंत्र जपते हैं। हर परिवार और क्षेत्र में तरीका थोड़ा अलग होता है, इसलिए जहाँ आपके परिवार या पंडित जी की रीति अलग हो, वहाँ उसी का पालन करें।
ज़रूरी सामग्री
सामान जमा करते हुए हर चीज़ पर टिक लगाइए। टिक इसी फ़ोन में रहते हैं।
एक दिन पहले
- पूजा का स्थान साफ़ करें और शिवलिंग व थाली को धीरे से धो लें।
- ताज़े बेलपत्र, फूल और दूध ले आएँ, और दूध को सुबह तक फ्रिज में रखें।
- बेलपत्र धोकर पोंछ लें और साबुत, बिना कटे पत्ते चुनें।
- सारी सामग्री एक ट्रे में निकालकर रख लें, ताकि कल कुछ छूटे नहीं।
- तय कर लें कि पूजा में कौन-कौन बैठेगा और लगभग आधे घंटे का समय खाली रखें।
कदम-दर-कदम विधि
- 1
स्नान और स्थान की सफ़ाई
स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। पूजा के स्थान पर झाड़ू-पोंछा करें और चारों ओर थोड़ा गंगाजल छिड़कें। हो सके तो चटाई या आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठें।
- 2
शिव जी को स्थापित करें
शिवलिंग को किनारे वाली थाली में रखें, जलहरी का मुख उत्तर की ओर रहे। दीपक, फूल, बेलपत्र और कटोरियाँ हाथ के पास रखें। यदि केवल तस्वीर है तो उसे साफ़ कपड़े पर अपने सामने रखें।
- 3
दीपक जलाएँ
घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ। हाथ जोड़कर प्रणाम करें और शुरू करने से पहले एक पल मन को शांत कर लें।
- 4
गणेश जी का स्मरण
हर पूजा की तरह पहले गणेश जी को याद करें। एक फूल या कुछ चावल के दाने चढ़ाकर कहें, ॐ गं गणपतये नमः, और पूजा निर्विघ्न होने की प्रार्थना करें।
- 5
सरल संकल्प लें
दाहिने हाथ में थोड़ा जल और चावल लें। अपने शब्दों में कहें कि आप परिवार की भलाई के लिए श्रद्धा से यह पूजा कर रहे हैं, फिर जल को एक छोटी कटोरी में छोड़ दें।
- 6
जल अभिषेक
थोड़े गंगाजल मिले साफ़ जल को शिवलिंग पर पतली धारा में धीरे-धीरे चढ़ाएँ। जल चढ़ाते समय मन में या हल्की आवाज़ में ॐ नमः शिवाय दोहराते रहें।
- 7
दूध और पंचामृत अभिषेक
पहले दूध धीरे-धीरे चढ़ाएँ, फिर दही, शहद, घी और चीनी एक-एक करके अर्पित करें। यह सब शांति से, बिना जल्दबाज़ी के करें। पाँचों चीज़ें न हों तो केवल दूध भी पर्याप्त है।
- 8
फिर से शुद्ध जल से स्नान
दूध आदि हटाने के लिए शिवलिंग को एक बार फिर साफ़ जल से धोएँ। नरम साफ़ कपड़े से धीरे से पोंछकर वापस थाली में रखें।
- 9
चंदन और भस्म
शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएँ। परिवार की रीति हो तो भस्म की तीन आड़ी रेखाएँ भी बनाएँ। ऊपर कुछ अक्षत के दाने रखें।
- 10
बेलपत्र और फूल
बेलपत्र चढ़ाएँ, चिकनी सतह शिवलिंग को छूती हुई रहे, फिर सफ़ेद फूल अर्पित करें। शांत मन और कृतज्ञ भाव से चढ़ाएँ।
- 11
धूप, नैवेद्य और जप
अगरबत्ती घुमाएँ, फिर फल और मिठाई शिव जी के सामने रखें। शांत बैठकर ॐ नमः शिवाय का 11 या 108 बार जप करें, माला हो तो उसका उपयोग करें।
- 12
आरती और प्रसाद
कपूर जलाकर परिवार के साथ शिव जी की आरती गाएँ। पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें, प्रणाम करें और फिर घर में सबको प्रसाद बाँटें।
ॐ नमः शिवाय
Om Namah Shivaya
मैं कल्याणकारी शिव को प्रणाम करता हूँ।
काम की बातें
- दूध और जल को एक साथ उड़ेलने के बजाय धीमी, पतली धार में चढ़ाएँ।
- परंपरा के अनुसार अभिषेक के लिए स्टील, तांबे, पीतल या मिट्टी का पात्र लें।
- बच्चों को फूल, बेलपत्र और आरती में शामिल करें, ताकि उन्हें पूजा अच्छी लगे।
- समय कम हो तो पूजा छोटी रख सकते हैं; जल, बेलपत्र और मंत्र ही पर्याप्त हैं।
- अभिषेक का उपयोग किया हुआ जल नाली में न बहाएँ, किसी पौधे या पेड़ की जड़ में डालें।
इन बातों का ध्यान रखें
- कृपया शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी या कुमकुम न चढ़ाएँ; शिव जी के लिए आमतौर पर इनका प्रयोग नहीं होता।
- कटे-फटे बेलपत्र और ज़मीन से उठाए हुए फूल चढ़ाने से बचें।
- पैकेट वाला या फ्लेवर वाला दूध न लें तो अच्छा है; सादा दूध सबसे उचित है।
- छोटी-मोटी भूलों की चिंता न करें; सच्चा मन पूजा की सही विधि से ज़्यादा मायने रखता है।
परिवार और क्षेत्र के अनुसार तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। जहाँ अलग हो, वहाँ अपने परिवार या पंडित जी का तरीका मानिए।