
कलश स्थापना के साथ दुर्गा पूजा
नवरात्रि में कलश के साथ माँ दुर्गा का घर में स्वागत
नवरात्रि में की जाती है, जो साल में दो बार, चैत्र और शारदीय, आती है। पहले दिन कलश स्थापित किया जाता है और नौ दिनों तक रोज़ पूजा चलती है।
पहले दिन लगभग 45 मिनट, बाद में रोज़ लगभग 20 मिनट
नवरात्रि में परिवार कलश स्थापित करके, जौ बोकर और नौ दिन सरल रोज़ाना अर्पण के साथ पूजा करके माँ दुर्गा का घर में स्वागत करते हैं। हर परिवार और क्षेत्र में तरीका थोड़ा अलग होता है, इसलिए जहाँ आपके परिवार या पंडित जी की रीति अलग हो, वहाँ उसी का पालन करें। कलश स्थापना की सही तिथि और मुहूर्त किसी पंडित जी या भरोसेमंद पंचांग से पक्का कर लेना सबसे अच्छा है।
ज़रूरी सामग्री
सामान जमा करते हुए हर चीज़ पर टिक लगाइए। टिक इसी फ़ोन में रहते हैं।
एक दिन पहले
- पंडित जी या भरोसेमंद पंचांग से तिथि और कलश स्थापना का मुहूर्त पक्का कर लें।
- नवरात्रि शुरू होने से एक दिन पहले पूरे घर की, खासकर पूजा स्थान की, सफ़ाई करें।
- मिट्टी, जौ, आम के पत्ते, नारियल, फूल और लाल कपड़ा ले आएँ।
- कलश धोकर रखें और चौकी पोंछ लें; सब सामान एक ट्रे में तैयार रखें।
- अपने परिवार की रीति के अनुसार नौ दिनों के लिए सादे सात्विक भोजन की योजना बना लें।
कदम-दर-कदम विधि
- 1
स्नान और स्थान की तैयारी
मुहूर्त से पहले स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। पूजा के स्थान पर चौकी रखें, उस पर लाल कपड़ा बिछाएँ और चारों ओर थोड़ा गंगाजल छिड़कें।
- 2
जौ बोएँ
चौड़ी थाली में साफ़ मिट्टी की एक परत बिछाएँ और उस पर जौ के दाने बिखेरें। ऊपर थोड़ी और मिट्टी डालें और कुछ बूँदें जल छिड़कें। इस थाली को चौकी पर रखें।
- 3
कलश भरें
कलश में साफ़ जल भरें और कुछ बूँदें गंगाजल की डालें। उसमें सुपारी, सिक्का और लौंग डालें। गर्दन पर कलावा बाँधें और रोली का तिलक लगाएँ।
- 4
कलश स्थापित करें
कलश को थाली के बीच में मिट्टी पर धीरे से रखें। आम के पत्तों को उसके मुँह में इस तरह लगाएँ कि नोक बाहर रहे। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर ऊपर रखें।
- 5
दीपक जलाएँ
कलश के पास घी का दीपक और फिर अगरबत्ती जलाएँ। हाथ जोड़कर पूजा शुरू करने से पहले एक शांत पल लें।
- 6
संकल्प लें
दाहिने हाथ में जल और चावल लें। अपने शब्दों में कहें कि आप परिवार की भलाई के लिए श्रद्धा से नवरात्रि पूजा आरंभ कर रहे हैं, और जल को कटोरी में छोड़ दें।
- 7
गणेश जी का स्मरण
सबसे पहले गणेश जी को फूल और थोड़े चावल चढ़ाकर कहें, ॐ गं गणपतये नमः। फिर कलश को सभी देवी-देवताओं का आसन मानकर प्रणाम करें।
- 8
माँ दुर्गा का आवाहन
माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर चौकी पर रखें। हाथ जोड़कर उनका स्वागत करें, रोली-अक्षत का तिलक लगाएँ और साफ़ गीले कपड़े से मूर्ति को धीरे से पोंछें।
- 9
चुनरी और श्रृंगार अर्पित करें
लाल चुनरी चढ़ाएँ, फिर बिंदी, सिंदूर और चूड़ियाँ अर्पित करें। माँ को लाल फूल या गुड़हल की माला पहनाएँ और कुछ फूल कलश के पास भी रखें।
- 10
धूप, भोग और जप
धूप घुमाएँ और माँ के सामने फल व घर का बना भोग रखें। शांत बैठकर ॐ दुं दुर्गायै नमः का 11 या 108 बार जप करें, माला हो तो उसका उपयोग करें।
- 11
आरती और प्रसाद
कपूर जलाकर परिवार के साथ दुर्गा जी की आरती गाएँ। किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें, प्रणाम करें और घर में सबको प्रसाद बाँटें।
- 12
नौ दिन की रोज़ की सेवा
रोज़ सुबह दीपक जलाएँ, ताज़े फूल, भोग और आरती अर्पित करें। जौ पर रोज़ थोड़ा जल छिड़कें और उसे उगते देखें। नवरात्रि के अंत में माँ का धन्यवाद करें और अपने परिवार की रीति अनुसार जौ व फूल नदी में प्रवाहित करें या किसी पेड़ की जड़ में रख दें।
ॐ दुं दुर्गायै नमः
Om Dum Durgayai Namah
मैं देवी दुर्गा को प्रणाम करता हूँ; दुं उनका पवित्र बीज स्वर है।
काम की बातें
- कलश को मिट्टी की थाली के बीच में रखें और नवरात्रि भर उसे हिलाएँ नहीं।
- जौ पर रोज़ केवल थोड़ा जल छिड़कें, ताकि दाने सड़ें नहीं।
- घी डालते रहें ताकि दीपक न बुझे, और पर्दों से सुरक्षित दूरी रखें।
- घर में ऐसी जगह चुनें जो शांत और साफ़ हो, और जौ के लिए थोड़ी रोशनी वाली हो।
- घर के सभी लोग आरती में शामिल हों; बच्चों को जौ की देखभाल करना अच्छा लगता है।
इन बातों का ध्यान रखें
- कृपया फटे या रिसते कलश अथवा टूटे हुए नारियल का उपयोग न करें।
- दीपक को लंबे समय तक अकेला न छोड़ें; किसी से उस पर नज़र रखने को कह दें।
- पूजा जल्दबाज़ी में शुरू न करें; शांत और साफ़ मन सबसे ज़रूरी है।
- सब कुछ पूरी तरह सही न हो पाए तो चिंता न करें; सच्चे मन का अर्पण ही पर्याप्त है।
परिवार और क्षेत्र के अनुसार तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। जहाँ अलग हो, वहाँ अपने परिवार या पंडित जी का तरीका मानिए।